जागरण समाचार प्रतिनिधि
मंगलौर। केंद्र और राज्य सरकार भले ही ‘स्वच्छ भारत मिशन’ के नाम पर करोड़ों रुपये पानी की तरह बहा रही हो, लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट है। रुड़की तहसील के निजामपुर गांव में स्वच्छता अभियान की खुलेआम धज्जियां उड़ रही हैं। गांव की नालियां पूरी तरह चोक हो चुकी हैं, जिसके कारण गंदा पानी सड़कों पर बह रहा है और ग्रामीणों का पैदल चलना भी दूभर हो गया है।ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले लंबे समय से गांव में सफाई व्यवस्था चरमराई हुई है। नालियों की सफाई न होने के कारण उनमें कूड़ा-करकट और कीचड़ जमा हो गया है। जलभराव की स्थिति ऐसी है कि गंदा पानी लोगों के घरों के दरवाजों तक पहुंच रहा है, जिससे संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा पैदा हो गया है।जलभराव के कारण मच्छरों का प्रकोप बढ़ रहा हैं जिससे संक्रामक बिमारियों के फैलने का खतरा उत्पन्न हो रहा हैं। गांव की मुख्य सड़कें और रिहायशी गलियों में नालियों का गंदा पानी बहने स्कूली बच्चों को भी भारी परेशानी उठानी पड़ रही हैं। सड़कों पर जमा गंदे पानी से उठने वाली दुर्गंध ने ग्रामीणों का जीना मुहाल कर दिया है। ग्रामीणों का कहना हैं कि एक तरफ सरकार हर गांव को ‘ओडीएफ प्लस’ और आदर्श गांव बनाने का दावा करती है, वहीं निजामपुर की यह स्थिति दावों की पोल खोल रही है। क्या वाकई बजट की कमी है या फिर यह प्रशासनिक उदासीनता का नतीजा है? ग्रामीण शिवकुमार, अनुज, अनिल कुमार, दिनेश, जितेंद्र सैनी, धर्मेंद्र, आदि ने इस मामले में उच्च अधिकारियों से हस्तक्षेप और जांच की मांग की हैं। ग्राम प्रधान तारा देवी का कहना है कि ग्राम पंचायत के लोग सरकार द्वारा निर्धारित यूजर चार्ज नहीं देते हैं इसके बाद भी उनकी ओर से समय-समय पर गांव में सफाई व्यवस्था कराई जा रही है। 21 मार्च को भी उनके द्वारा गांव में तो मजदूर लगाकर नालियों की सफाई कराई गई है।
