जागरण समाचार प्रतिनिधि
मंगलौर। जब सरकारी विभाग आंकड़ों के खेल में उलझ जाते हैं, तो उसका खामियाजा अक्सर आम जनता को भुगतना पड़ता है। इसी तरह का खेल अब ऊर्जा निगम द्वारा खेला जा रहा है। ऊर्जा निगम के ‘टारगेट’ का करंट, उपभोक्ताओं को आर्थिक झटके के रूप में लग रहा है। वित्तीय वर्ष समाप्ति होने पर ऊर्जा निगम में इन दिनों ‘टारगेट’ पूरा करने की ऐसी होड़ मची है किनियम – कानून ताक पर रख दिए गए हैं। उच्च अधिकारियों के दबाव में निगम के कर्मचारी अब उपभोक्ताओं के उत्पीड़न पर उतारू हैं। ताज़ा मामला घर बैठे मनमानी मीटर रीडिंग भेजने और मैसेज के जरिए उपभोक्ताओं को मानसिक तनाव देने का सामने आया है।
आंकड़ों की बाजीगरी से जनता परेशान हो रही है।
कस्बे के अधिकांश उपभोक्ताओं का आरोप है कि ऊर्जा निगम के अधिकारी अपने वार्षिक लक्ष्यों को पूरा करने के लिए गलत हथकंडे अपना रहे हैं। बिना मीटर चेक किए, दफ्तर में बैठकर ही बेतहाशा रीडिंग भर दी जा रही है। जब उपभोक्ताओं के मोबाइल पर बिल के मैसेज पहुंच रहे हैं, तो उनके होश उड़ रहे हैं। नरेंद्र कुमार, नीतेश कुमार, परवीन कुमार, अवनीश, तिलक, आरिफ जमाल, रामकुमार, अरविंद, दीप गुलाटी, पाटिल सुभाष, मनीष, गौरव, बजाज आदि के अलावा अन्य सैकड़ो उपभोक्ताओं के बिल के कई गुना होने के मैसेज लगातार मोबाइल पर पहुंच रहे है। सवाल यह उठता है कि क्या सरकारी लक्ष्यों की बलि आम जनता ही चढ़ेगी।

बिना घर आए मीटर की रीडिंग कई गुना बढ़ाकर दिखाई जा रही है। जिससे मानसिक तनाव बढ़ रहा है। – नीतेश अग्रवाल

उपभोक्ताओं को भारी – भरकम बिल के मैसेज भेजकर उन पर भुगतान का दबाव बनाया जा रहा है। जो कि गलत है- अवनीश गर्ग

गलत बिलों को ठीक कराने के लिए उपभोक्ताओं को दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं, जिससे उनका समय और पैसा दोनों बर्बाद हो रहा है।- आरिफ जमाल

अधिकारी सिर्फ अपनी फाइलें दुरुस्त करने में लगे हैं। उन्हें इस बात से कोई सरोकार नहीं है कि एक आम आदमी इतना भारी बिल कैसे भरेगा। यह सीधे तौर पर आर्थिक उत्पीड़न है।- मनीष लूथरा
इस संबंध में जब अधिकारियों से संपर्क किया गया तो वह मार्च महीने में टारगेट पूरा करने की बात कहकर पल्ला झाड़ ले रहे है।
