मंगलौर। श्री दिगंबर जैन मंदिर मंगलौर में जैन समाज द्वारा युग के प्रथम प्रवर्तक श्री आदिनाथ भगवान के जन्म कल्याणक दिवस श्री सुधा सागर जी के मार्गदर्शन से जन्म दिवस को तीर्थंकर दिवस के रूप मे मनाया गया समाज द्वारा इस पर्व पर भगवान आदिनाथ की विशेष शांतिधारा की गई जिसमें समस्त जैन समाज ने पूरे विश्व की शांति की कामना की पर देश विदेश में हो रहे युद्ध को शांति हेतु अर्चना की गयी
जैन समाज द्वारा बताया गया कि इस युग के प्रारंभ में सर्व प्रथम आदिनाथ भगवान का जन्म प्रथम तीर्थंकर के रूप में हुआ था जिसमें बाद जैन समाज के 23 तीर्थंकर और हुए जिसमें भगवान महावीर जैन समाज के अंतिम तीर्थंकर थे
समाज द्वारा तीर्थंकर दिवस की विशेष पूजन की जो सुधा सागर जी महाराज द्वारा ही बताई गई है
भगवान आदिनाथ के द्वारा ही मानव समाज को “असी, मसी, कृषि, वाणिज्य ,शिल्प ,कला” आदि सभी के संदेश और सिखाया। आदिनाथ भगवान का संदेश था ऋषि बनो या कृषि करो प्रथम बार स्त्री शिक्षा को देने वाले भी आदिनाथ भगवान ही थे जिन्होंने अपनी पुत्रि को स्वयं शिक्षा दी, भगवान आदिनाथ के पुत्र चक्रवर्ती भरत के नाम से ही भारत देश का नाम भारत है
भगवान आदिनाथ का समस्त मानव समाज पर अनेक उपकार है आदिनाथ जैनों के ही नहीं बल्कि जन जन के भगवान है जैन समाज ने मिलकर आदिनाथ भगवान का अभिषेक और पूजन में सभी को शुभ कामनाएं दी। साय : काल में आचार्य मांगतुंग जी द्वारा भक्तामर स्तोत्र का पाठ 48 दीपकों से अर्चना की भक्तामर स्तोत्र संस्कृत में रचित है कार्यक्रम में कार्यकारणी समिति सहित समाज के अजय जैन, पंकज जैन, श्रेयांश जैन, अनुज जैन, अखिल जैन, सम्यक जैन, प्रशाल जैन, अर्णव जैन आदि उपस्थित थे महिला जैन समाज ने अपनी भूमिका निभाते हुए महा आरती की जिसमें सारिका, अनुष्का, साक्षी, यांशी जैन आदि रहे।
