रिपोर्ट- जागरण समाचार प्रतिनिधि
मंगलौर। जैन समाज में उस समय भक्ति और उत्साह का माहौल छा गया, जब आर्यिका रत्न श्री सरस्वती मति माताजी ने अपने तीन सदस्यीय संघ के साथ नगर में मंगल प्रवेश किया। माताजी का यह प्रवास उनकी अष्टापद (बद्रीनाथ) की ओर चल रही पावन पदयात्रा का हिस्सा है। नगर की सीमा पर समाज के प्रबुद्ध जनों ने बैंड-बाजों और जयकारों के साथ माताजी की अगवानी की। नगर आगमन के पश्चात आर्यिका संघ का प्रवास जैन अतिथि भवन में रहा। सुबह की बेला में माताजी के आहार चर्या संपन्न हुई। माता जी को आहार देने का सौभाग्य समस्त जैन समाज को प्राप्त हुआ। इस दौरान पूरा वातावरण ‘गुरु माँ’ के जयकारों से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से माताजी की वंदना कर आशीर्वाद प्राप्त किया। आर्यिका संघ के मंगल प्रवेश और प्रवास की समस्त व्यवस्थाओं को सुचारू रूप से संचालित करने में गौरव जैन, श्रेयांश जैन एडवोकेट, सचिन जैन और अमित जैन का विशेष दायित्व रहा। इन युवाओं की टीम ने माताजी की पदयात्रा से लेकर विश्राम तक की सभी व्यवस्थाओं को बखूबी संभाला।माताजी के आगमन से पूरे क्षेत्र में धर्म की गंगा बह रही है। स्थानीय जैन समाज के लोगों का कहना है कि माताजी के दर्शन मात्र से मन में शांति और वैराग्य के भाव जागृत हो रहे हैं। माताजी अपनी पदयात्रा के माध्यम से अहिंसा और संयम का संदेश दे रही हैं। अष्टापद जी की ओर बढ़ते उनके कदम श्रद्धालुओं के लिए प्रेरणा का केंद्र बने हुए हैं। इस अवसर पर नगर के सैकड़ों महिला-पुरुष और बच्चे माताजी के दर्शनार्थ उमड़े।
