दिशा सामाजिक संगठन ने आयोजित की मीडिया कार्यशाला: महिला हिंसा के खिलाफ मीडिया की भूमिका पर मंथन
बेहट। दिशा सामाजिक संगठन, सुल्तानपुर चिलकाना के तत्वावधान में शनिवार को बेहट स्थित नेशनल पब्लिक स्कूल में ‘महिला हिंसा एवं जेंडर समानता’ विषय पर एक दिवसीय मीडिया कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में क्षेत्र के लगभग 30 पत्रकारों और स्वैच्छिक कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया और महिला अधिकारों के प्रति मीडिया की जिम्मेदारी पर विस्तृत चर्चा की। कार्यक्रम समन्वयक पी. राम ने संस्था के 42 वर्षों के संघर्षपूर्ण सफर पर प्रकाश डालते हुए कहा कि महिलाओं की आवाज को जन-जन तक पहुँचाने में मीडिया की भूमिका अतुलनीय है। उन्होंने कार्यशाला के उद्देश्यों को रेखांकित करते हुए कहा कि जेंडर समानता के लिए समाज की मानसिकता में बदलाव जरूरी है। वरिष्ठ समाजसेवी व एडवोकेट अहमद काज़मी ने कहा कि सरकार ने महिलाओं के संरक्षण के लिए कई कठोर कानून बनाए हैं, लेकिन इनका लाभ तब तक नहीं मिल सकता जब तक आमजन और स्वयं महिलाएं इनके प्रति जागरूक न हों। पीरू भाई ने अपने संबोधन में कहा कि महिलाओं को समान अवसर और अधिकार देना देश की प्रगति के लिए अनिवार्य हैं। वरिष्ठ कॉर्डिनेटर जाह्नवी तिवारी ने जोर देकर कहा कि महिला हिंसा समाज के हर वर्ग में व्याप्त एक कड़वी सच्चाई है। उन्होंने शांति और भाईचारे के साथ मिलकर इस बुराई को जड़ से मिटाने का आह्वान किया। वहीं, कॉर्डिनेटर शाहीन परवीन ने कहा कि अवसर मिलने पर महिलाएं किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं, बस समाज को हिंसा मुक्त वातावरण देने की जरूरत है कार्यक्रम समन्वयक तसनीम ने बालिकाओं व किशोरियों के साथ हो रही शारीरिक, यौनिक एवं मानसिक हिंसा को गंभीर विषय बताया। उन्होंने शिक्षा के प्रति समाज को जागरूक करने की अपील की। कॉर्डिनेटर बबीता वर्मा ने घरेलू हिंसा और दहेज प्रथा जैसी कुरीतियों पर प्रहार किया, जबकि सहायक कॉर्डिनेटर सुरेश ने संस्था द्वारा संचालित ‘महिला प्रकोष्ठ’ और ‘नारी अदालत’ की कार्यप्रणाली के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इस अवसर पर विनोद कुमार, एस.एम. हुसैन जैदी, मो. इकबाल, सैफी, सत्तार, गय्यूर मलिक, अशोक सैनी, धर्मेन्द्र सैनी, शेख परवेज आलम, शैंकी अरोरा और मारुफ़ अली आदि पत्रकारों ने अपने विचार रखे। सभी ने एकमत होकर दिशा संस्था के प्रयासों की सराहना की और महिला उत्थान के कार्यों में हर संभव सहयोग देने का आश्वासन दिया। कार्यक्रम को सफल बनाने में अर्चना, बबीता, आरिफ़ा और फरहान आदि का सराहनीय योगदान रहा।
