जागरण समाचार प्रतिनिधि
मंगलौर। आगामी चुनावी बिसात बिछाने में जुटे क्षेत्र के एक दिग्गज नेताजी को ग्रामीणों की एकजुटता भारी पड़ती दिखाई दे रही है। यात्रा के लिए पर्याप्त वाहनों की व्यवस्था न होने से ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से यात्रा पर जाने से मना कर दिया है। यह स्थिति तब पैदा हुई जब नेताजी के खास सलाहकार ने संसाधनों की कमी का हवाला देते हुए हाथ खड़े कर दिए।जानकारी के अनुसार नेताजी ने अपने क्षेत्र के एक गांव से 55 लोगों की सूची तैयार करने के पार्टी के एक पदाधिकारी को निर्देश दिए थे ताकि उन्हें धार्मिक यात्रा पर ले जाया जा सके नेताजी की इस पहल पर ग्रामीणों में भारी उत्साह देखा गया और देखते ही देखते यात्रा पर जाने वालों की संख्या 100 के पार पहुंच गई। ग्रामीणों को उम्मीद थी कि नेताजी बढ़ी हुई संख्या को देखते हुए अतिरिक्त व्यवस्था करेंगे मामला तब बिगड़ गया जब बढ़ी हुई भीड़ के लिए दूसरी बस की मांग की गई। बताया जा रहा है कि नेताजी के खास सलाहकार ने एक की जगह दो बसों का इंतजाम करने में असमर्थता जता दी। सलाहकार के इस रुख से ग्रामीणो की एकजुटता ने खेल बिगाड़ दिया। बुधवार को प्रस्तावित इस यात्रा को लेकर ग्रामीणों ने अनूठी मिसाल पेश की। जिन ग्रामीणों के लिए बस में जगह थी उन्होंने यह कहते हुए जाने से इनकार कर दिया कि यदि हमारे सभी साथी साथ नहीं चलेंगे तो उनमें से भी कोई यात्रा पर नहीं जाएगा। ग्रामीणों की इस सामूहिक ना के बाद नेताजी के खेमे में खलबली मची हुई है। इसी तरह से नारसन क्षेत्र के एक ओर गांव में भी दो बसों की मांग पर केवल एक बस भेजी गई यहां पर भी आधे से ज्यादा ग्रामीण यात्रा पर जाने से वंचित रहे।राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि जनता को रिझाने के लिए चली गई यह चाल अब नेताजी के लिए गले की फांस बन गई है। क्योंकि यात्रा के नाम पर शुरू हुआ यह उत्साह अब नाराजगी में बदल सकता है। यात्रा पर भेजने के लिए सूची बनाने वाले पदाधिकारी से संपर्क करने का प्रयास किया गया परंतु उन्होंने फोन नहीं उठाया। नेताजी के चाहने वाले अब भी उनके प्रति ग्रामीणो की नाराजगी नहीं होने की बात कर रहे हैं।
