रिपोर्ट- जागरण समाचार प्रतिनिधि
देहरादून। अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के सभागार में उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण द्वारा एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में उत्तराखंड के विभिन्न अल्पसंख्यक समुदायों जैन, बौद्ध, क्रिश्चियन, पारसी, मुस्लिम एवं सिख समुदाय के उन शिक्षण संस्थानों के प्राचार्यों एवं प्रबंधकों को आमंत्रित किया गया था, जो वर्तमान में शिक्षा विभाग से मान्यता प्राप्त संस्थानों का संचालन कर रहे हैं। बैठक को संबोधित करते हुए उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के निदेशक गिरधारी सिंह रावत ने प्राधिकरण से संबद्ध होने हेतु उत्तराखंड सरकार द्वारा निर्धारित नियमों एवं प्रक्रियाओं की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि निर्धारित मानकों एवं नियमों को पूर्ण करने वाले सभी शिक्षण संस्थान, उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की मान्यता प्राप्त करने हेतु निर्धारित प्रपत्र के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि इस प्रक्रिया के लिए शीघ्र ही एक आधिकारिक वेबसाइट लॉन्च की जाएगी। तब तक सभी संस्थानों से आवश्यक दस्तावेज एवं आवेदन संबंधी प्रपत्र तैयार रखने को कहा गया। उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के अध्यक्ष डॉ. सुरजीत सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड सरकार द्वारा राज्य के अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों के लिए यह एक अभिनव एवं दूरदर्शी पहल की गई है। उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था से विभिन्न धर्मों से संबंधित धार्मिक शिक्षा के पाठ्यक्रम में एकरूपता स्थापित होगी तथा प्राधिकरण द्वारा धार्मिक शिक्षा से संबंधित परीक्षाओं का आयोजन कर प्रमाण पत्र भी प्रदान किए जाएंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी विद्यार्थी को धार्मिक शिक्षा ग्रहण करने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा। साथ ही यह भी बताया गया कि उत्तराखंड के अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों में प्राधिकरण द्वारा निर्धारित पाठ्यक्रम को 1 जुलाई 2026 से लागू किया जाएगा। बैठक में उप-पंजीयक राम सिंह, खुर्शीद, विजय, रमीज रजा, फरहा सहित प्रदेश के 63 शिक्षण संस्थानों के प्राचार्य, प्रबंधक एवं अन्य गणमान्य प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
