रिपोर्ट👉 जागरण समाचार प्रतिनिधि
मंगलौर में कांवड़ यात्रा व्यवस्था को झटका: 50 से अधिक एस पी ओ में से अधिकांश गायब
बस अड्डे के पास 10 में से बमुश्किल एक-दो ही आ रहे नजर, यात्रा के चार दिन बाद भी सुस्ती
मंगलौर: कांवड़ यात्रा को सुगम, सुरक्षित और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए पुलिस प्रशासन के दावे धरातल पर हवा होते दिख रहे हैं। यात्रा व्यवस्था में सहयोग के लिए बनाए गए विशेष पुलिस अधिकारी अपने कर्तव्य को लेकर जरा भी गंभीर नजर नहीं आ रहे हैं। आलम यह है कि एस पी ओ का दायित्व सिर्फ पहचान पत्र (आई-कार्ड) और जरूरी सामान हासिल करने तक ही सिमट कर रह गया है।
इस वर्ष पुलिस प्रशासन की ओर से मंगलोर क्षेत्र में 50 से अधिक संभ्रांत एवं स्थानीय युवाओं को विशेष पुलिस अधिकारी मनोनीत किया गया था ताकि वे हाईवे और संवेदनशील स्थलों पर तैनात रहकर शासन-प्रशासन की मदद कर सकें। हालांकि जिम्मेदारी मिलने के बाद अधिकांश एस पी ओ मौके से नदारद हैं जानकारी के मुताबिक रोडवेज बस अड्डे के पास भीड़ और यातायात नियंत्रण के लिए 10 से अधिक एस पी ओ को उनकी इच्छानुसार सहयोग के लिए नियुक्त किया गया था। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि वहां महज एक-दो एस पी ओ के अलावा कोई अन्य ड्यूटी पर नजर नहीं आ रहा है। कांवड़ यात्रा शुरू हुए चार दिन का समय बीत चुका है और हाईवे पर शिवभक्तों का रेला लगातार बढ़ता जा रहा है। ऐसे में विशेष पुलिस अधिकारियों की इस बेरुखी से व्यवस्था बनाने में जुटी पुलिस टीम पर अतिरिक्त दबाव बढ़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन को केवल आई-कार्ड बांटने तक सीमित न रहकर इन अधिकारियों की मौजूदगी भी सुनिश्चित करानी चाहिए ताकि कांवड़ यात्रा के दौरान किसी भी आपात स्थिति या जाम से निपटा जा सके। इस तरह की स्थिति एक जगह नहीं बल्कि सभी प्वाइंटों पर नजर आ रही है अब्दुल कलाम चौक, गोल्डन ढाबा, रोडवेज बस अड्डातिराहा, गंग नहर पुल, झबरेड़ा तिराहा, देवबन्द तिराहा पर भी यही स्थिति बनी हुई है।
