रिपोर्ट👉 जागरण समाचार प्रतिनिधि
मंगलौर: डिप्लोमा फार्मेसिस्ट एसोसिएशन शाखा हरिद्वार ने अपनी 5 सूत्रीय मांगों की अनदेखी से नाराज होकर एक बार फिर आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है। संगठन ने महानिदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण को अपनी मांगों से संबंधित एक ज्ञापन सौंपा है। संघ का कहना है कि लगातार आग्रह के बावजूद विभागीय स्तर पर कोई कार्रवाई न होने से राज्य भर के फार्मेसी अधिकारियों में गहरा असंतोष व्याप्त है। संघ का कहना है कि पदोन्नति के अवसर कम होने के कारण 34-35 वर्षों की सेवा के बाद भी पहली पदोन्नति नहीं मिल पाती। 2017 से लागू एमएसीपी व्यवस्था के चलते 2009 के बाद नियुक्त फार्मेसिस्टों को वित्तीय नुकसान हो रहा है। संगठन ने मांग की है कि पूर्व की व्यवस्था ACP के तहत 10 वर्ष की सेवा पर प्रथम पदोन्नति पद चीफ फार्मेसी अधिकारी का वेतनमान दिया जाए। साथ ही 14 दिसंबर 2023 के शासनादेश का हवाला देते हुए नॉन-फंक्शनल वेतनमान को एमएसीपी की गणना में इग्नोर करने की मांग की गई है। पर्वतीय व दुर्गम क्षेत्रों में प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाएं मजबूत करने के लिए वर्ष 2005-06 में सृजित 536 पदों में से स्थगित किए गए 391 पदों को पुनर्जीवित करने का आग्रह किया गया है। संघ का कहना है कि इस प्रस्ताव को कार्मिक व स्वास्थ्य विभाग की मंजूरी मिल चुकी है अब इस पर राज्य कैबिनेट की मोहर लगाई जानी चाहिए। दवाओं के अतार्किक उपयोग और ड्रग रेजिस्टेंस को रोकने के लिए फार्मेसी प्रैक्टिस रेगुलेशन 2015 लागू करने तथा हर अस्पताल में रोगियों की काउंसलिंग हेतु काउंसिलिंग कक्ष का निर्माण करने की मांग रखी गई। दुर्गम क्षेत्रों, चारधाम यात्रा ड्यूटी या डॉक्टर की अनुपस्थिति में फार्मेसी अधिकारियों को ओडिशा व असम की तर्ज पर सूचीबद्ध बीमारियों के लिए निर्धारित दवाएं देने हेतु अधिकृत किया जाए। यात्रा व मेलों में तैनात फार्मेसिस्टों के बकाया यात्रा भत्तों का शीघ्र भुगतान करने, उचित आवास व भोजन व्यवस्था सुनिश्चित करने तथा प्रोत्साहन भत्ते की दरों की समीक्षा करने की मांग उठाई गई. ज्ञापन में स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि मांगों पर ठोस कार्रवाई न होने पर संगठन चरणबद्ध आंदोलन पर विवश होगा। विज्ञापन देने वालों में मुख्य रूप से एसपी बडोला, बृजेश कुमार, राजीव गोयल, पंकज रावत, ऋषि सदाना, विपिन कुमार, जमशेद अली आदि मौजूद रहे।
